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फ्रीडम बीच पर बने ढांचों के लिए नए ध्वस्तीकरण नोटिस चस्पा

शाही वन विभाग RFD ने फुकेत के कारोन स्थित फ्रीडम बीच के पास संरक्षित वनभूमि पर बने ढांचों के लिए नए ध्वस्तीकरण नोटिस चस्पा किए हैं। जिम्मेदार लोगों को 9 अक्तूबर 2026 से 15 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने को कहा गया है।

फ्रीडम बीच पर बने ढांचों के लिए नए ध्वस्तीकरण नोटिस चस्पा

शाही वन विभाग (RFD) ने फुकेत के कारोन स्थित फ्रीडम बीच के पास संरक्षित वनभूमि पर बने ढांचों के लिए नए ध्वस्तीकरण नोटिस चस्पा किए हैं। जिम्मेदार लोगों को 9 अक्तूबर 2026 से 15 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने को कहा गया है।

राष्ट्रीय आरक्षित वन अधिनियम, 1964 की धारा 25 के तहत जारी इन नोटिसों में नक्करड हिल्स राष्ट्रीय वन आरक्षित क्षेत्र की लगभग 9 राय, 1 न्गान और 20 वर्ग वा भूमि शामिल है।

वन अधिकारियों ने बताया कि कब्जाधारियों और उनके सहयोगियों को आरक्षित वन से हटने, अवैध गतिविधियां रोकने, ढांचों को गिराने तथा खतरों और पर्यावरणीय क्षति का समाधान करने का पिछला आदेश लागू नहीं किया गया। अधिकारियों के अनुसार, आदेश का पालन करने और भूमि अधिकारों से संबंधित आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा भी बीत चुकी है।

वन संसाधन प्रबंधन कार्यालय संख्या 12 के अधीन वन संरक्षण एवं वनाग्नि नियंत्रण प्रभाग की क्राबी शाखा के निदेशक सम्फान मीसित ने नोटिस चस्पा करने वाली टीम का नेतृत्व किया। 8 अक्तूबर को कारोन नगर पालिका, कारोन पुलिस थाने, कारोन के मू 1 स्थित ग्राम प्रधान कार्यालय और फ्रीडम बीच पर नोटिस चस्पा किए गए। इसके बाद 9 अक्तूबर को फुकेत प्रांतीय भवन और मुआंग फुकेत जिला कार्यालय में भी नोटिस लगाए गए।

वन संरक्षण इकाई PhK.2 को कानूनी कार्यवाही में इस्तेमाल के लिए कारोन पुलिस थाने के आधिकारिक रोजनामचे में इन नोटिसों का रिकॉर्ड दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। वन संसाधन प्रबंधन कार्यालय संख्या 12 को ध्वस्तीकरण की लागत का अनुमान लगाने और कार्रवाई के लिए बजट तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

यदि 15 दिनों के भीतर ढांचों को नहीं गिराया गया, तो शाही वन विभाग खुद यह कार्रवाई करेगा और कानून के तहत जिम्मेदार लोगों से खर्च की वसूली करेगा।

यह कार्रवाई जुलाई में की गई उस घोषणा के बाद हुई है, जिसमें अधिकारियों ने फ्रीडम बीच पर 22 इमारतों और अन्य ढांचों को गिराने का आदेश दिया था। जांच में पाया गया था कि ये ढांचे संरक्षित वनभूमि पर अवैध रूप से बनाए गए थे। 18 मार्च को किए गए निरीक्षण में स्थल पर वनभूमि साफ किए जाने की बात सामने आई थी, जबकि 12 जून के बाद किए गए निरीक्षण में ढांचों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

जुलाई के आदेश में कब्जाधारियों को क्षेत्र खाली करने के लिए 5 अगस्त तक का समय दिया गया था, अन्यथा जबरन ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी गई थी। शाही वन विभाग ने भूमि दस्तावेजों से समर्थित लंबे समय से कब्जे के दावे को खारिज करते हुए कहा कि दस्तावेज कारोन में अतिक्रमित क्षेत्र के बजाय पातोंग की भूमि से संबंधित थे।