फुकेत में रोश हशनाह कार्यक्रम रद्द होने के बाद इज़राइली राजदूत ने विरोध-प्रदर्शनों को कमतर बताया
थाईलैंड में इज़राइल की राजदूत अलोना फिशर-काम्म ने हाल के इज़राइल-विरोधी प्रदर्शनों को कमतर बताते हुए मध्य पूर्व के संघर्ष को थाईलैंड तक फैलने से रोकने के लिए सहयोग का आह्वान किया है।
थाईलैंड में इज़राइल की राजदूत अलोना फिशर-काम्म ने हाल के इज़राइल-विरोधी प्रदर्शनों को कमतर बताते हुए मध्य पूर्व के संघर्ष को थाईलैंड तक फैलने से रोकने के लिए सहयोग का आह्वान किया है।
15 सितंबर 2026 को एएफपी से बात करते हुए फिशर-काम्म ने कहा कि थाईलैंड की स्थिति को यहूदी-विरोधी कहना उनके लिए मुश्किल है। उन्होंने इसके लिए उस सहिष्णुता का हवाला दिया, जिसे वह देश की विशेषता मानती हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ इज़राइली आगंतुकों से जुड़े “अनादर के मामले” और “दुर्व्यवहार” सामने आए हैं। उन्होंने इसे इज़राइलियों और थाई लोगों के बीच संभावित सांस्कृतिक अंतर बताया।
हाल के हफ्तों में बैंकॉक स्थित इज़राइली दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुए हैं। पिछले सप्ताह अति-राजशाही समर्थक ‘येलो शर्ट’ आंदोलन के नेता सोंधी लिमथोंगकुल के नेतृत्व में हुई रैली में कुछ प्रदर्शनकारियों ने “यहूदियों, बाहर निकलो” और “तुम यहूदी लोग थाई संस्कृति को नहीं समझते, इसलिए बाहर निकलो” जैसे संदेशों वाली तख्तियां उठाई थीं।
फुकेत में यहूदी नववर्ष रोश हशनाह के अवसर पर आयोजित रात्रिभोज को हिंसा की आशंका के कारण अंतिम समय में रद्द कर दिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग के यहूदी-विरोधी भावना संबंधी विशेष दूत रब्बी येहूदा कपलून ने एक्स पर कहा कि वह “थाईलैंड में बढ़ती यहूदी-विरोधी बयानबाजी को लेकर बेहद चिंतित” हैं।
फिशर-काम्म ने कहा कि सोशल मीडिया पर होने वाली गतिविधियां घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही हैं और इज़राइलियों तथा थाई लोगों को अलग करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने तनाव कम करने के तरीकों पर चर्चा के लिए पिछले सप्ताह थाईलैंड के विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेतकेओ से मुलाकात की।
प्रदर्शनों का मुख्य ध्यान थाई रीति-रिवाजों के प्रति इज़राइली पर्यटकों के कथित अनादर पर रहा है। कोह सामुई में एक फ्रांसीसी नागरिक और उनकी थाई पत्नी ने कथित खराब व्यवहार का हवाला देते हुए अपने चिड़ियाघर में इज़राइली आगंतुकों के प्रवेश पर रोक लगा दी, जिसके बाद वे सुर्खियों में आ गए। थाई सरकार ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी नागरिक को निर्वासित करने का आदेश दिया। इसके लिए कई मुद्दों का हवाला दिया गया, जिनमें यह जोखिम भी शामिल था कि उनके कदम धार्मिक विभाजन भड़का सकते हैं।
थाई मीडिया ने इज़राइली नागरिकों द्वारा जमीन और कारोबार के विदेशी स्वामित्व पर लगी पाबंदियों से बचने के लिए थाई नामधारी लोगों के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की भी खबर दी है। इन खबरों में कोह फांगन पर स्थित एक कथित अवैध स्कूल और एक यहूदी कब्रिस्तान का उल्लेख था। वहां रहने वाले इज़राइलियों की बड़ी संख्या के कारण इस स्कूल को “लिटिल तेल अवीव” के नाम से जाना जाता है। कब्रिस्तान में कथित तौर पर लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद शव दफनाए गए थे। फिशर-काम्म ने कहा कि इन घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा था।
इज़राइली दूतावास ने आगंतुकों के आचरण संबंधी नियमों वाले हिब्रू भाषा के ब्रोशर तैयार किए हैं और उन्हें सोशल मीडिया, विमानन कंपनियों तथा यात्रा एजेंसियों के माध्यम से वितरित कर रहा है। सिहासक ने कहा कि थाईलैंड का स्वागत सभी राष्ट्रीयताओं के लोगों के लिए है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पर्यटक जो चाहें कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष 4,20,000 से अधिक इज़राइली थाईलैंड आए थे। फिशर-काम्म ने कहा कि कई इज़राइली पर्यटक संघर्ष से जितना संभव हो उतना दूर रहना चाहते थे। उन्होंने कहा कि यूरोप शायद अब उन्हें उतना आकर्षक नहीं लगता, जितना पहले लगता था।