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एनएसीसी फुकेत प्रांत में 200 मिलियन बाट की आओ पोर फेरी घाट परियोजना की दूसरी खरीद प्रक्रिया पर नजर रख रहा है

राष्ट्रीय भ्रष्टाचार-रोधी आयोग NACC फुकेत प्रांत में समुद्री विभाग की 200 मिलियन बाट की आओ पोर फेरी घाट परियोजना के लिए खरीद प्रक्रिया के दूसरे दौर की निगरानी कर रहा है, क्योंकि शुरुआती बोली प्रक्रिया में ठेकेदार का चयन नहीं हो सका था।

एनएसीसी फुकेत प्रांत में 200 मिलियन बाट की आओ पोर फेरी घाट परियोजना की दूसरी खरीद प्रक्रिया पर नजर रख रहा है

राष्ट्रीय भ्रष्टाचार-रोधी आयोग (NACC) फुकेत प्रांत में समुद्री विभाग की 200 मिलियन बाट की आओ पोर फेरी घाट परियोजना के लिए खरीद प्रक्रिया के दूसरे दौर की निगरानी कर रहा है, क्योंकि शुरुआती बोली प्रक्रिया में ठेकेदार का चयन नहीं हो सका था।

आयोग ने कहा कि उसके अधिकारियों ने परियोजना के क्रियान्वयन का निरीक्षण करने और खरीद प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए बैठक की तथा स्थल निरीक्षण किया।

समुद्री विभाग ने कहा कि बोलीदाताओं का अपतटीय निर्माण की विशेष श्रेणी में महालेखा नियंत्रक विभाग के साथ पंजीकृत निर्माण ठेकेदार होना अनिवार्य है। प्रासंगिक नियमों में बदलाव के बाद परियोजना के मध्य मूल्य की फिर से गणना करनी पड़ी। अब इसकी गणना मध्य मूल्य समिति द्वारा तय मानदंडों के तहत की जा रही है और इसे मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुरूप संशोधित किया गया है।

समुद्री विभाग को उम्मीद है कि अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले 30 अक्टूबर 2026 तक सबसे कम बोलीदाता का चयन कर लिया जाएगा। निर्माण कार्य 900 दिनों में पूरा होना है और इसके मई 2029 में पूरा होने की उम्मीद है।

आओ पोर घाट उन चार सुविधाओं में से एक है, जिन्हें फांग न्गा खाड़ी में जल परिवहन मार्ग विकसित करने के अध्ययन के हिस्से के रूप में प्रस्तावित किया गया है। अन्य प्रस्तावित घाट फांग न्गा प्रांत में मनोह और चोंग लाड तथा क्राबी प्रांत में था लेन हैं।

इस प्रस्तावित नेटवर्क का उद्देश्य अंडमान रिंग जलमार्ग के जरिए फुकेत, फांग न्गा और क्राबी को जोड़ना, सड़क परिवहन की तुलना में यात्रा समय कम करना और फुकेत व क्राबी के बीच फांग न्गा खाड़ी के पार वाहनों को ले जाने की सुविधा उपलब्ध कराना है। व्यापक परियोजना का उद्देश्य तीनों प्रांतों में पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना भी है।

NACC के फुकेत स्थित कार्यालय ने समुद्री विभाग को सलाह दी कि खरीद-पूर्व और बोली चरणों के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। इनमें मध्य मूल्य का उचित निर्धारण, इलेक्ट्रॉनिक बोली घोषणाओं और दस्तावेजों का प्रकाशन, बोलीदाताओं की योग्यताओं का आकलन तथा प्रस्तावों के मूल्यांकन के स्पष्ट मानदंडों का इस्तेमाल शामिल है।

कार्यालय ने बोली और मूल्यांकन के दौरान उत्पन्न होने वाले जोखिमों की पहचान कर उन्हें कम करने का भी आह्वान किया, ताकि पारदर्शिता बढ़े और जनहित अधिकतम हो। उसने कहा कि वह संबंधित एजेंसियों की निगरानी और संबंधित कानूनों व विनियमों के अनुपालन पर नजर रखना जारी रखेगा।