फुकेत प्रांत के अधिकारियों ने जलवायु जोखिमों के प्रबंधन के लिए जलागम-आधारित क्षेत्र निर्धारण का प्रस्ताव रखा
फुकेत प्रांत के अधिकारियों ने बाढ़, सूखे और अत्यधिक गर्मी से जुड़े जोखिमों की पहचान और प्रबंधन के लिए जलागम-आधारित क्षेत्र निर्धारण का प्रस्ताव रखा है। तेजी से हो रहे विकास के कारण द्वीप के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है।
फुकेत प्रांत के अधिकारियों ने बाढ़, सूखे और अत्यधिक गर्मी से जुड़े जोखिमों की पहचान और प्रबंधन के लिए जलागम-आधारित क्षेत्र निर्धारण का प्रस्ताव रखा है। तेजी से हो रहे विकास के कारण द्वीप के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है।
यह प्रस्ताव 6 नवंबर 2026 को विश्व नगर नियोजन दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पेश किया गया। कार्यक्रम Phuket Boutique Hotel Phuket में “अस्थिर दुनिया के लिए थाई शहरी नियोजन” विषय के तहत हुआ। फुकेत प्रांत के गवर्नर चोटिनारिन केरडसोम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इसमें सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संगठनों से करीब 300 लोगों ने भाग लिया। फुकेत प्रांतीय लोक निर्माण एवं नगर तथा देश नियोजन कार्यालय के प्रमुख थम्मारित रितफकडी भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम पर जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में पर्यावरणीय और आपदा संबंधी जोखिमों का आकलन करने तथा भूमि उपयोग नियोजन और भविष्य के विकास का मार्गदर्शन करने के लिए जलागम क्षेत्रों का उपयोग किया जाएगा। इसमें केवल पारंपरिक भूमि उपयोग क्षेत्र निर्धारण पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्येक क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं और सीमाओं को ध्यान में रखा जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि फुकेत प्रांत को शहरी विस्तार और पर्यटन विकास से जुड़ी बढ़ती नियोजन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक उपयोगिताओं और भूमि संसाधनों पर बढ़ता दबाव शामिल है। रिपोर्ट ने पर्यावरणीय संतुलन और निवासियों के जीवन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए भविष्य के विकास के लिए शहरी नियोजन में आपदा जोखिम प्रबंधन को शामिल करना आवश्यक बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम पातोंग में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटना के 12 दिन बाद हुआ था। इस घटना से हुए नुकसान का अनुमान 100 मिलियन बाट लगाया गया था।
विश्व नगर नियोजन दिवस के कार्यक्रम पूरे देश में आयोजित किए गए। बैंकॉक में हुए राष्ट्रीय कार्यक्रम में गृह मंत्रालय के स्थायी सचिव अरसित सम्पन्थारत ने भूमि उपयोग मानदंड और विकास दिशानिर्देश तय करने में लोक निर्माण एवं नगर तथा देश नियोजन विभाग की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे शहर बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग जरूरी है, जो आपदाओं का सामना कर सकें, संकटों से उबर सकें और व्यापक वैश्विक बदलावों के अनुरूप ढल सकें।