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फुकेत के स्कूल ने लो-कार्बन शिक्षण केंद्र खोला

फुकेत स्थित चालर्मप्रकियात सोमदेत फ्रा श्रीनाकरिन स्कूल ने 25 अगस्त 2026 को लो-कार्बन शिक्षण केंद्र खोला। समारोह में 400 से अधिक सरकारी अधिकारियों, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों ने भाग लिया।

फुकेत के स्कूल ने लो-कार्बन शिक्षण केंद्र खोला

फुकेत स्थित चालर्मप्रकियात सोमदेत फ्रा श्रीनाकरिन स्कूल ने 25 अगस्त 2026 को लो-कार्बन शिक्षण केंद्र खोला। समारोह में 400 से अधिक सरकारी अधिकारियों, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों ने भाग लिया।

यह केंद्र जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन, ग्रीनहाउस गैसों में कमी और सतत पर्यावरण प्रबंधन पर सीखने तथा ज्ञान के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करता है। यह फुकेत प्रांत की विकास रणनीति और स्मार्ट सिटी लक्ष्यों को समर्थन देता है। केंद्र में केकड़ों को छोड़ने, डिजिटल वृक्ष मानचित्रण, पौध बैंक, युवा पर्यावरणीय नवाचार, शून्य-कचरा प्रथाओं, पुनर्चक्रण, जैव-कम्पोस्ट निर्माण, जैविक खेती और सतत इकोटूरिज्म समेत 12 शिक्षण केंद्र बनाए गए हैं।

इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों को प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव देना है। इस स्कूल को पर्यावरण प्रबंधन के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण शिक्षा के साथ संसाधन संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन तथा छात्रों द्वारा विकसित उत्पादों और नवाचारों को जोड़ा गया है।

स्कूल ने 2025 में राष्ट्रीय लो-कार्बन स्कूल परियोजना प्रतियोगिता की समूह बी माध्यमिक विद्यालय श्रेणी में पहला पुरस्कार जीता था और महामहिम राजकुमारी महा चक्री सिरिंधोर्न से राजकीय ट्रॉफी प्राप्त की थी। इसके बाद इसे एक शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया गया, ताकि अन्य स्कूलों, समुदायों और स्थानीय क्षेत्रों के साथ अपना अनुभव साझा किया जा सके।

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण विभाग के उप महानिदेशक कोमेस फुत्तासोर्न ने केंद्र का आधिकारिक उद्घाटन किया। समारोह में नखोन सी थम्मारात प्रांत में एक अलग लो-कार्बन स्कूल शिक्षण केंद्र के लिए 20,000 बाट की अनुदान राशि और सहायक सामग्री प्रदान करना भी शामिल था।

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण विभाग ने कहा कि उसकी लो-कार्बन समुदाय और लो-कार्बन स्कूल परियोजनाओं का उद्देश्य देशभर में इसी तरह के केंद्र स्थापित करना और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन तथा उपभोग की प्रथाओं को बढ़ावा देना है।