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Phuket ने रोग निगरानी मजबूत करने के लिए ‘One Health’ रणनीति अपनाई

Phuket के अधिकारियों ने संक्रामक रोगों और अन्य स्वास्थ्य खतरों का पता लगाने, उन्हें रोकने तथा उनसे निपटने की प्रांत की क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से ‘One Health’ रणनीति अपनाई है। इस पहल पर मंगलवार, 14 जुलाई को Phuket के प्रांतीय जन स्वास्थ्य कार्यालय में आयोजित एक प्रांतीय बैठक में चर्चा की गई।

Phuket ने रोग निगरानी मजबूत करने के लिए ‘One Health’ रणनीति अपनाई

Phuket के अधिकारियों ने संक्रामक रोगों और अन्य स्वास्थ्य खतरों का पता लगाने, उन्हें रोकने तथा उनसे निपटने की प्रांत की क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से ‘One Health’ रणनीति अपनाई है।

इस पहल पर मंगलवार, 14 जुलाई को Phuket के प्रांतीय जन स्वास्थ्य कार्यालय में आयोजित एक प्रांतीय बैठक में चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता उप-गवर्नर सुवित फानसेनगियम ने की। इसमें रोग नियंत्रण विभाग के उप महानिदेशक डॉ. दिरेक खमफाएन के साथ जन स्वास्थ्य क्षेत्र, पशुधन प्राधिकरणों, प्राकृतिक संसाधन एजेंसियों, स्थानीय प्रशासनिक संगठनों और अन्य साझेदार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

अधिकारियों ने कहा कि यह एकीकृत दृष्टिकोण Phuket को एक सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि थाईलैंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल Phuket में पर्यटन और आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए मजबूत जन स्वास्थ्य सुरक्षा आवश्यक है।

बैठक में कहा गया कि उभरते संक्रामक रोगों, जानवरों और मनुष्यों के बीच फैलने वाली बीमारियों तथा पर्यावरणीय खतरों सहित आधुनिक स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए कई क्षेत्रों के बीच समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। डॉ. दिरेक ने कहा कि One Health की अवधारणा एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय जानकारी साझा करने तथा रोग निगरानी और प्रतिक्रिया में समन्वय स्थापित करने में सक्षम बनाएगी।

उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य, पशुधन और पर्यावरण एजेंसियों के बीच डेटा और संचालन को जोड़ने से अधिकारी जोखिमों की अधिक तेजी से पहचान कर सकेंगे और जन स्वास्थ्य आपात स्थितियों पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकेंगे।

रोग नियंत्रण विभाग ने 2026 के वित्तीय वर्ष के दौरान One Health नीति लागू करने में हुई प्रगति की भी जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि One Health स्थिति आकलन और सहयोगात्मक रोग-प्राथमिकता योजना का 91.67% काम पूरा हो चुका है, जबकि 83.33% प्रांतीय कार्यसमूहों की स्थापना की जा चुकी है।

बैठक में साझा डेटाबेस विकसित करने, कर्मचारियों की क्षमता मजबूत करने और एकीकृत निगरानी तथा रोग-नियंत्रण योजनाएं तैयार करने पर भी चर्चा की गई। इन उपायों का उद्देश्य पहले ही रोगों का पता लगाकर, तेजी से हस्तक्षेप कर और अधिक प्रभावी रोकथाम के जरिए स्थानीय प्रतिक्रिया में सुधार करना है।