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फुकेत प्रांत ने 16 दिसंबर के राजमाता सम्मान समारोहों के लिए तीन स्थल तय किए

फुकेत प्रांत 16 दिसंबर को राजमाता के सम्मान में होने वाले राजकीय दाह संस्कार अनुष्ठानों के तहत तीन मंदिरों में सार्वजनिक रूप से चंदन के फूल अर्पित करने के समारोह आयोजित करेगा। निर्धारित स्थल हैं—वाट चालोंग, जिसका औपचारिक नाम वाट चैयाथाराराम है, वाट कथु और थालांग में स्थित वाट थेपवानाराम।

फुकेत प्रांत ने 16 दिसंबर के राजमाता सम्मान समारोहों के लिए तीन स्थल तय किए

फुकेत प्रांत 16 दिसंबर को राजमाता के सम्मान में होने वाले राजकीय दाह संस्कार अनुष्ठानों के तहत तीन मंदिरों में सार्वजनिक रूप से चंदन के फूल अर्पित करने के समारोह आयोजित करेगा।

निर्धारित स्थल हैं—वाट चालोंग, जिसका औपचारिक नाम वाट चैयाथाराराम है, वाट कथु और थालांग में स्थित वाट थेपवानाराम। वाट कथु में समारोह सुबह 9 बजे शुरू होगा। चंदन के फूलों की राख को समर्पित पुण्य-समारोह 17 दिसंबर को वाट चालोंग में आयोजित किया जाएगा।

स्थलों पर तैयारियां जारी हैं। फुकेत के उप-गवर्नर रोमडोन हाइयावे ने 21 अक्टूबर को चालोंग की महापौर समरान जिंदापोन और अन्य अधिकारियों के साथ वाट चालोंग का निरीक्षण किया। इस दौरान स्थल की रूपरेखा, सार्वजनिक सुविधाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई।

वाट कथु में 20 अक्टूबर को कथु जिला प्रमुख विट्टाया जित्सुपाप की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्थानीय प्रशासन, सरकारी एजेंसियों और निजी क्षेत्र से जुड़े इंतजामों पर चर्चा की गई। प्रारंभिक पूर्वाभ्यास 20 नवंबर को और पूर्ण पूर्वाभ्यास 10 दिसंबर को निर्धारित किया गया है।

प्रांतीय एजेंसियों ने दिसंबर समारोहों में शामिल होने वाले आम लोगों में बांटने के लिए चंदन के फूल, जिन्हें ‘डोक माई चान’ कहा जाता है, बनाना भी शुरू कर दिया है। फुकेत किशोर एवं परिवार न्यायालय, कथु उप-जिला नगर पालिका और श्रम मंत्रालय के अधीन पांच एजेंसियों के कर्मियों ने 22 अक्टूबर को फूल बनाने में हिस्सा लिया।

इन तैयारियों के क्रम में 24 अक्टूबर को फुकेत प्रांतीय भवन में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम सुबह 7:15 बजे महीसोन फाकदी सभागार में शुरू हुआ। फुकेत के उप-गवर्नर सुवित फानसांगियम ने गृहस्थ पक्ष के अध्यक्ष की भूमिका निभाई, जबकि फुकेत के उप-प्रांतीय बौद्ध प्रमुख और वाट थेपवानाराम के मठाधीश फ्रा वचिरथम्मासोफोन ने वरिष्ठ भिक्षु के रूप में धार्मिक अध्यक्षता की।

कार्यक्रम में बौद्ध प्रार्थनाएं, पुण्यकर्म, भिक्षुओं को वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुएं अर्पित करना तथा राजमाता के चित्र के सामने जनता द्वारा चंदन के फूल अर्पित करना शामिल था। सुबह 8:30 बजे भिक्षादान समारोह हुआ। बौद्ध भिक्षु, सरकारी एजेंसियों के प्रमुख और अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने दिसंबर के आयोजनों के लिए कचरा प्रबंधन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। इनमें कचरे का पृथक्करण, खाद्य अपशिष्ट में कमी, पर्याप्त कूड़ेदान, सफान हिन में कचरा हटाना, पुराने कचरा-भराव स्थलों से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और उपयुक्त कचरे को कचरे से तैयार ईंधन में बदलने की संभावित प्रक्रिया शामिल थी। स्थानीय प्रशासनिक संगठनों से समारोह मंडपों और आम लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था में समन्वय करने को कहा गया।