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फुकेत उड़ान घटना के बाद एयर इंडिया ने पायलटों की जांच का दायरा बढ़ाया

एयर इंडिया ने 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली जा रही AI2379 उड़ान की ऊंचाई में करीब 300 फीट की कमी आने और 17 लोगों के घायल होने के बाद अपने पायलटों के लिए मादक पदार्थों की जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

फुकेत उड़ान घटना के बाद एयर इंडिया ने पायलटों की जांच का दायरा बढ़ाया

एयर इंडिया ने 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली जा रही AI2379 उड़ान की ऊंचाई में करीब 300 फीट की कमी आने और 17 लोगों के घायल होने के बाद अपने पायलटों के लिए मादक पदार्थों की जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

एयरलाइन ने एक स्पष्टीकरण में कहा कि विस्तारित परीक्षण कार्यक्रम सुरक्षा और पेशेवर मानकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के तहत चलाया जा रहा है। उसने मीडिया और अन्य हितधारकों से प्रक्रिया तथा संबंधित जांच जारी रहने के दौरान अटकलों से बचने की अपील की।

घटनाक्रम से परिचित लोगों के अनुसार, घटना के बाद किए गए प्रारंभिक मादक पदार्थ परीक्षणों में एयर इंडिया के दो और पायलटों के नतीजे कथित तौर पर “नॉन-नेगेटिव” आए हैं। पुष्टिकरण जांच के नतीजे लंबित हैं और अंतिम रिपोर्ट आने तक दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है।

प्रारंभिक नॉन-नेगेटिव नतीजे से यह साबित नहीं होता कि पायलट ने किसी प्रतिबंधित पदार्थ का इस्तेमाल किया था। पुष्टिकरण परीक्षण आवश्यक है, क्योंकि शुरुआती नतीजों पर वैध दवाओं या अन्य पदार्थों का असर पड़ सकता है।

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कॉकपिट क्रू के लिए चलाए जा रहे एकबारगी अनिवार्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत करीब 400 पायलटों की जांच हो चुकी है। दोनों एयरलाइनों में 5,000 से अधिक पायलट हैं। एयर इंडिया ने 13 अगस्त 2026 को सभी पायलटों और केबिन क्रू को मन:प्रभावी पदार्थों की जांच कराने का आदेश दिया था, जो भारत के नागरिक उड्डयन नियामक की मौजूदा आवश्यकताओं से भी आगे है।

फुकेत से दिल्ली जाने वाली उड़ान के कप्तान भी एक अलग मामले में प्रारंभिक जांच में नॉन-नेगेटिव नतीजा आने के बाद जांच के दायरे में आए थे। हालांकि, विमान के उड़ान डेटा रिकॉर्डरों के प्रारंभिक आकलन से संकेत नहीं मिला कि अचानक ऊंचाई कम होने के पीछे मानवीय कार्रवाई थी।

एयरबस A320neo विमान के बारे में शुरुआत में बताया गया था कि उसे वायु अशांति का सामना करना पड़ा था। बाद में उड़ान डेटा के प्रारंभिक आकलन में पता चला कि विमान की तीनों स्वतंत्र हाइड्रोलिक प्रणालियों में हाइड्रोलिक नियंत्रण अस्थायी रूप से खत्म हो गया था, जिससे विमान के प्रमुख उड़ान नियंत्रण कई सेकंड तक काम नहीं कर सके।

आकलन में पाया गया कि ग्रीन, ब्लू और येलो हाइड्रोलिक प्रणालियों में दबाव करीब एक सेकंड के भीतर गिर गया। दबाव खत्म होने से एलेवेटर और एलेरॉन कुछ समय के लिए प्रभावित हुए। एलेरॉन एक ही दिशा में चले, जिससे अतिरिक्त लिफ्ट पैदा हुई और पायलट के किसी हस्तक्षेप के बिना विमान की नाक तेजी से ऊपर उठ गई। ऑटोपायलट अलग हो गया, जिसके बाद सह-पायलट ने मैनुअल नियंत्रण संभाला और विमान की नाक नीचे की ओर की।

इसके परिणामस्वरूप विमान के तेजी से नीचे की ओर त्वरण से यात्री और केबिन क्रू ऊपर उछल गए। तेरह यात्री और चालक दल के चार सदस्य घायल हुए। विमान दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतरा, जहां घायलों को चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

करीब पांच सेकंड बाद तीनों प्रणालियों में हाइड्रोलिक दबाव बहाल हो गया। इससे उड़ान-नियंत्रण कंप्यूटर फिर से जुड़ सके और विमान पायलटों के आदेशों पर प्रतिक्रिया देने लगा। जांचकर्ताओं ने अभी यह तय नहीं किया है कि हाइड्रोलिक प्रणालियों में खराबी आई थी या किसी खराब तार अथवा सेंसर ने गलत चेतावनी उत्पन्न की थी।

घटना को गंभीर श्रेणी में रखा गया है और इसकी जांच भारत का विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो कर रहा है, जिसमें एयरबस सहयोग कर रहा है।

एयरबस ने एयर इंडिया से हाइड्रोलिक दबाव स्विचों में से एक की जांच करने को कहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह खराब था और उसने गलत सिग्नल भेजा था या नहीं।